आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "telegram"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "telegram"
ग़ज़ल
शौक़ बहराइची
ग़ज़ल
शब कट गई फ़ुर्क़त की देखा न 'फ़िराक़' आख़िर
तूल-ए-ग़म-ए-हिज्राँ भी बे-कार नज़र आया
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "telegram"
शब कट गई फ़ुर्क़त की देखा न 'फ़िराक़' आख़िर
तूल-ए-ग़म-ए-हिज्राँ भी बे-कार नज़र आया