आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "tikaa"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "tikaa"
ग़ज़ल
ऐसा अनोखा ऐसा तीखा जिस को कोई सह न सके
हम समझे पत्ती पत्ती को हम ने ही सरशार किया
मीना कुमारी नाज़
ग़ज़ल
माथे पर टीका संदल का अब दिल के कारन रहता है
मंदिर में मस्जिद बनती है मस्जिद में बरहमन रहता है
क़य्यूम नज़र
ग़ज़ल
बाग़ी ना-फ़रमान बनी और कभी कलंक का टीका
हक़ की ख़ातिर जब भी किसी उसूल पे अड़ गई बेटी
समीना असलम समीना
ग़ज़ल
शाद अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
हलाल उस ने किया ख़ून-ए-मुसलमाँ वाए बेदर्दी
तिरा दस्त-ए-हिनाई काफ़िर अब ये रंग लाया है