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ग़ज़ल
दर्शन सिंह
ग़ज़ल
हमें कू-ब-कू जो लिए फिरी किसी नक़्श-ए-पा की तलाश थी
कोई आफ़्ताब था ज़ौ-फ़गन सर-ए-रहगुज़ार कहाँ रहा
अदा जाफ़री
ग़ज़ल
सितारों की तरह अल्फ़ाज़ की ज़ौ बढ़ती जाती है
ग़ज़ल में हुस्न उस चेहरे की ताबानी से आया है
फ़सीह अकमल
ग़ज़ल
लिए ज़ौक़-ए-सज्दा में दर-ब-दर फिरा मैं ने पाया नहीं मगर
जहाँ अपने आप झुके जबीं इसी आस्ताँ की तलाश है
जे. पी. सईद
ग़ज़ल
फिर गर्म-ए-नवाज़िश है ज़ौ मेहर-ए-दरख़्शाँ की
फिर क़तरा-ए-शबनम में हंगामा-ए-तूफ़ाँ है
असग़र गोंडवी
ग़ज़ल
सलाम मछली शहरी
ग़ज़ल
एक चेहरे को तरसती हैं निगाहें सुब्ह ओ शाम
ज़ौ-फ़िशाँ ख़ुर्शीद भी है चाँदनी के साए भी
हबीब जालिब
ग़ज़ल
ज़िया अंदर ज़िया तनवीर दर तनवीर ज़ौ दर ज़ौ
कोई आख़िर कहाँ तक राज़-हा-ए-ज़िंदगी