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ग़ज़ल
सादगी पर उस की मर जाने की हसरत दिल में है
बस नहीं चलता कि फिर ख़ंजर कफ़-ए-क़ातिल में है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
हमीं थे जान-ए-बहाराँ हमीं थे रंग-ए-तरब
हमीं हैं बज़्म-ए-मय-ओ-गुल में आज मोहर-ब-लब
अमीन राहत चुग़ताई
ग़ज़ल
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ग़ज़ल
जो रहा यूँ ही सलामत मिरा जज़्ब-ए-वालहाना
मुझे ख़ुद करेगा सज्दा तिरा संग-ए-आस्ताना
फ़ारूक़ बाँसपारी
ग़ज़ल
जो रहा यूँ ही सलामत मिरा जज़्ब-ए-वालिहाना
मुझे ख़ुद करेगा सज्दा तिरा संग-ए-आस्ताना