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ग़ज़ल
इस सियासत में मियाँ आबाद हो जाने के बा'द
मर गए किरदार ज़िंदाबाद हो जाने के बा'द
बिलाल सहारनपुरी
ग़ज़ल
ज़िंदाबाद ऐ दिल मिरे मैं भी हूँ तुझ से मुत्तफ़िक़
प्यार सच्चा है तो फिर कैसी वफ़ा कैसी जफ़ा
कृष्ण बिहारी नूर
ग़ज़ल
जीत बख़्शे जो चराग़ों को हवा ज़िंदाबाद
उस पे क़ुर्बान चराग़ों की ज़िया ज़िंदाबाद
काज़िम हुसैन काज़िम
ग़ज़ल
जुनून-ए-शौक़ ज़िंदाबाद तू ने वो निगाहें दीं
कि घर बैठे हुए तेरा बयाबाँ देख लेते हैं
राज कुमारी सूरज कला सरवर
ग़ज़ल
ज़िंदाबाद न कहने वाले कितने बाग़ी क़त्ल हुए
मुहर-ब-लब लोगों के घर क्या सच-मुच रोटी पकती है
सय्यद आशूर काज़मी
ग़ज़ल
ऐ मेरे सब्र ज़िंदाबाद ऐ मेरी प्यास ज़िंदाबाद
जो पैमाने कि ख़ाली थे वो सब छलके हुए से हैं