aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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२बरतरी के सुबूत की ख़ातिर
2वो सुब्ह हमीं से आएगी
(2)चाहा है इसी रँग में लैला-ए-वतन को
आओ कि आज ग़ौर करें इस सवाल परदेखे थे हम ने जो वो हसीं ख़्वाब क्या हुए
बरस के हीरे पिरो गए हैं2
2ये सहरा कैसा सहरा है
२'इंशा' जी दुनिया वालों में बे-साथी बे-दोस्त रहे
(2)मत रो बच्चे
ऐ जहाँ-ज़ाद,नशात उस शब-ए-बे-राह-रवी की
(2)جانتا ہوں ميں يہ امت حامل قرآں نہيں
वस्ल-ए-हिज्राँ बहम हुए कितने2
बिपता में याद आने वाले(2)
धुआँ धुआँ सी ज़मीं है घुला घुला सा फ़लक2
फ़लक पे तारों को पहली जमाहियाँ आईं2
(2)آفاق کے ہر گوشے سے اٹھتي ہيں شعاعيں
(2)मगर नहीं कुछ और मस्लहत थी उस के आने में
(2)कौन आज़ाद हुआ?
वक़्त की आँख पे पट्टी बाँध के खेल रहे थे आँख-मिचोलीरात और दिन और चाँद और मैं
पेशानी-ए-आदा पे सियाही हुई तहरीर(2)
(2)छलनी है अँधेरे का सीना, बरखा के भाले बरसे हैं
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