aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ",DqTT"
ज़ुल्म की रात बहुत जल्द टलेगी अब तोआग चूल्हों में हर इक रोज़ जलेगी अब तो
सिर्फ़ लब-दोख़्ता पर्बत हैं जहाँ नौहा-कुनाँन दर-ओ-बाम न दीवार ओ दरीचा कोई
अजनबी रहने दे मुझ को, मुझे अपना न बनामें तिरी माँग सितारों से नहीं भर सकता
खेमा-ए-ग़म की तनाब-ए-रेशमीं टूटी नहींतीरगी के राहज़न ने दुख़्त-ए-रज़ लूटी नहीं
वक़्त पर मज़मून लिक्खो ज़ोर-दारवक़्त पर डट कर लड़ो मर्दाना-वार
तेरे ख़्वाबों के दरीचों से हटा कर पर्देक्यूँ जगाऊँ तिरी ख़्वाबीदा तमन्नाओं को?
सनसनाहटों के साथगड़गड़ाहटो के साथ
अपनी याद लेती जाओअब न रख सकूँगा मैं
आदमी डट कर अगर मेहनत करेफिर कमा ले अपना ज़र खोया हुआ
आँख बंद होते हीख़्वाब जाग जाते हैं
मैं ज़िंदगी हूँ ज़िंदगी ये है मिरा नाम-ओ-निशाँमेरे क़दम जब डट गए
हम ख़ूब मिठाई खाएँगेहम डट कर शीर उड़ाएँगे
रात आते ही मुझे ख़ुद से भी डर लगता हैपेड़ चलते हैं हवाओं से सदा आती है
बाद मुद्दत चले आए कैसे इधरआज किस तरह मेरा ख़याल आ गया
क़ाबों में था गोश्त भरासब ने वो डट कर खाया
चाँद और भी दमकता हैमेघ-दूत के काले घने हल्क़े से निकल कर
डट गए नज़्म-ए-वतन की ख़ातिरअज़्म-ओ-हिम्मत से शुजाअ'त से नया काम लिया
दुश्मन के सर कटे पड़े हैंजहाँ अड़े हैं डट के अड़े हैं
मैं ना माखन खायो मय्या में ना माखन-चोरमुल्ला खा गए पंडित खा गए खा गए रिश्वत-ख़ोर
इस भरे शहर में हर चीज़ की क़ीमत ठहरीदर्द बिक जाते हैं जज़्बात बिका करते हैं
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