aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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वो बर्क़ लहर बुझा दी गई है जिस की तपिशवजूद-ए-ख़ाक में आतिश-फ़िशाँ जगाती थी
कि वतन-बदर हों हम तुमदें गली गली सदाएँ
छोटे से एक शहर में सड़कों का एक जालसड़कों के जाल में छुपी वीरान सी गली
मिरे गले में तुम्हारी गुदाज़ बाहें हैंतुम्हारे होंटों पे मेरे लबों के साए हैं
गली के मोड़ पे सूना सा कोई दरवाज़ातरसती आँख में रस्ता किसी का देखेगा
जहाँ-ज़ाद नीचे गली में तिरे दर के आगेये मैं सोख़्ता-सर हसन-कूज़ा-गर हूँ!
छुपा छुपा के ख़मोशी में अपनी बेचैनीख़ुद अपने राज़ की तशहीर बन गई हो तुम
जिन्हें सहर निगल गई, वो ख़्वाब ढूँढता हूँ मैंकहाँ गई वो नींद की, शराब ढूँढता हूँ मैं
इसी बे-नूर अँधेरी सी गली-क़ासिम सेएक तरतीब चराग़ों की शुरूअ' होती है
बड़े सुकून से तुम सो गए वहाँ जा करये कैसे नींद तुम्हें आ गई नए घर में
गली का रंग देख करनई तरंग देख कर
जब आश्ना थी मोहब्बत की हर गली मुझ सेमैं ज़िंदगी से बहुत ख़ुश था ज़िंदगी मुझ से
आख़िर-ए-कार वो घड़ी आईबार-वर हो गए रक़ीब मिरे
वो कीमिया-गरी तिरे जमाल की बरस पड़ीमैं सैल-ए-नूर-ए-अंदरूँ से धुल गया!
जहाँ-ज़ाद कैसे हज़ारों बरस बादइक शहर-ए-मदफ़ून की हर गली में
जो मेरे तेरे शहर कीहर इक गली में
आँख खुल गई मेरीहो गया मैं फिर ज़िंदा
गली में जाती होजाते ही लौट आती हो
मय-नोशी हो बेहोशी हो ''भड़वे'' की मुँह में गाली हो
सामने मेरी मदह-सराई पीछे गाली देता हैहमदर्दी है कोई दिखाता कोई साज़िश करता है
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