आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",HPLi"
नज़्म के संबंधित परिणाम ",Hpli"
नज़्म
बद-हाल घरों की बद-हाली बढ़ते बढ़ते जंजाल बनी
महँगाई बढ़ कर काल बनी सारी बस्ती कंगाल बनी
साहिर लुधियानवी
नज़्म
सफ़-बस्ता हों मरहूमा के सब वारिस-ओ-वाली
'आज़ाद'-ओ-'नज़ीर'-ओ-'शरर'-ओ-'शिबली'-ओ-'हाली'
रईस अमरोहवी
नज़्म
ठुमक ठुमक के चले थे घरों के आँगन में
'अनीस' ओ 'हाली' ओ 'इक़बाल' और 'वारिस-शाह'
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की
और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नज़्म
ये 'नानक' की ये 'ख़ुसरव' की 'दया-शंकर' की बोली है
ये दीवाली ये बैसाखी ये ईद-उल-फ़ित्र होली है