आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",QueH"
नज़्म के संबंधित परिणाम ",queH"
नज़्म
घबरा के फिर सुकूत-ए-चमन से चमन-नवाज़
करने लगे फ़ुग़ान-ए-'अनादिल की आरज़ू
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
नज़्म
मुख़्तार अपने दिल के हैं रिंदों का राज है
साक़ी का 'अर्श से भी कुछ ऊँचा मिज़ाज है
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
नज़्म
मैं ने बचपन में सुना था कि इसी दुनिया में
जिस में हम रहते हैं परियों के तिलिस्मात भी हैं
रज़ी अख़्तर शौक़
नज़्म
और भी गुर हैं कई रोज़ी कमाने के लिए
छोड़ ये चोरी के धंदे कोई अच्छा काम कर