आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",fIKf"
नज़्म के संबंधित परिणाम ",fiKf"
नज़्म
क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँ
फ़िक्र-ए-फ़र्दा न करूँ महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
आज़ाद फ़िक्र से हूँ उज़्लत में दिन गुज़ारूँ
दुनिया के ग़म का दिल से काँटा निकल गया हो
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मैं सारी ज़िंदगी के दुख भुगत कर तुम से कहता हूँ
बहुत दुख देगी तुम में फ़िक्र और फ़न की नुमू मुझ को
जौन एलिया
नज़्म
जिस्म पर क़ैद है जज़्बात पे ज़ंजीरें हैं
फ़िक्र महबूस है गुफ़्तार पे ताज़ीरें हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ये ज़ेहन में बनती और बिगड़ती हुई फ़ज़ाएँ
वो फ़िक्र में आए ज़लज़ले हों कि दिल की हलचल
जावेद अख़्तर
नज़्म
फिर देखे हैं वो हिज्र के तपते हुए दिन भी
जब फ़िक्र-ए-दिल-ओ-जाँ में फ़ुग़ाँ भूल गई है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
और कुछ देर में जब फिर मिरे तन्हा दिल को
फ़िक्र आ लेगी कि तन्हाई का क्या चारा करे