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नज़्म
ये रुपहली छाँव ये आकाश पर तारों का जाल
जैसे सूफ़ी का तसव्वुर जैसे आशिक़ का ख़याल
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
वो दोशीज़ा भी शायद दास्तानों की हो दिल-दादा
उसे मालूम होगा 'ज़ाल' था 'सोहराब' का दादा
जौन एलिया
नज़्म
साहिर लुधियानवी
नज़्म
हत्ता कि अपने ज़ोहद-ओ-रियाज़त के ज़ोर से
ख़ालिक़ से जा मिला है सो है वो भी आदमी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
निगाह-ए-शौक़ जल उठी हिजाब ढूँढता हूँ मैं
जिन्हें सहर निगल गई वो ख़्वाब ढूँढता हूँ मैं
आमिर उस्मानी
नज़्म
नज़र आता है यूँ लगता है जैसे ये बला-ए-जाँ
मिरा हम-ज़ाद है हर गाम पर हर मोड़ पर जौलाँ
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
तू ने लिख्खा था जला दूँ मैं तिरी तहरीरें
तू ने चाहा था जला दूँ मैं तिरी तस्वीरें