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नज़्म
गले में हार फूलों का चरण में दीप-मालाएँ
मुकुट सर पर है मुख पर ज़िंदगी की रूप-रेखाएँ
नज़ीर बनारसी
नज़्म
फ़ुनून-ए-लतीफ़ा ख़ुदावंद के हुक्म-नामे, फ़रामीन
जिन्हें मस्ख़ करते रहे पीर-ज़ादे, जहाँ के अनासिर
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
कर रक्खा था चेहरा अपना दुख-मुख से बे-परवा उस ने
मेरी तरफ़ तकने से पहले चारों जानिब देखा उस ने
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
अल्लाह की बनाई हुई चीज़ों को मस्ख़ करने की कोशिश की है
लेकिन इंसान मौत को गदला नहीं कर सका