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नज़्म
कुछ मुखड़ा करता दमक दमक कुछ अबरन करता झलक झलक
जब पाँव रखा ख़ुश-वक़्ती से तब पाइल बाजी झनक झनक
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
मैं पल दो पल का शा'इर हूँ पल दो पल मिरी कहानी है
पल दो पल मेरी हस्ती है पल दो पल मिरी जवानी है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
मुझ से मिलने में अब अंदेशा-ए-रुस्वाई है
मैं ने ख़ुद अपने किए की ये सज़ा पाई है
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
कार-ख़ानों के भूके जियालों के नाम
बादशाह-ए-जहाँ वाली-ए-मा-सिवा, नाएब-उल-अल्लाह फ़िल-अर्ज़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ता'मीर के रौशन चेहरे पर तख़रीब का बादल फैल गया
हर गाँव में वहशत नाच उठी हर शहर में जंगल फैल गया
साहिर लुधियानवी
नज़्म
ये खेप भरे जो जाता है ये खेप मियाँ मत गिन अपनी
अब कोई घड़ी पल सा'अत में ये खेप बदन की है कफ़नी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
और जब याद की बुझती हुई शम्ओं में नज़र आया कहीं
एक पल आख़िरी लम्हा तिरी दिलदारी का
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
अंजुम-ए-कम-ज़ौ गिरफ़्तार-ए-तिलिस्म-ए-माहताब
देखता क्या हूँ कि वो पैक-ए-जहाँ-पैमा ख़िज़्र
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मोहब्बत ही से पाई है शिफ़ा बीमार क़ौमों ने
किया है अपने बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता को बेदार क़ौमों ने