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नज़्म
तुम्हारी अर्जुमंद अम्मी को मैं भूला बहुत दिन में
मैं उन की रंग की तस्कीन से निमटा बहुत दिन में
जौन एलिया
नज़्म
दुनिया की महफ़िलों से उक्ता गया हूँ या रब
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जलाना दिल का है गोया सरापा नूर हो जाना
ये परवाना जो सोज़ाँ हो तो शम-ए-अंजुमन भी है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
काँटे भी राह में हैं फूलों की अंजुमन भी
तुम फ़ख़्र-ए-क़ौम बनना और नाज़िश-ए-वतन भी
अहमद हातिब सिद्दीक़ी
नज़्म
سوچ تو دل ميں ، لقب ساقي کا ہے زيبا تجھے؟
انجمن پياسي ہے اور پيمانہ بے صہبا ترا!
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ख़ून जिस का बिजलियों की अंजुमन में बारयाब
जिस के सर पर जगमगाती है कुलाह-ए-आफ़्ताब