aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "بے_قدر"
रुस्वा यूँ सर-ए-बाज़ार कियाक्यों बे-क़द्रे की ख़ातिर यूँ
मिरे दिल की नादानियाँ कोई देखेउन्हें भी ब-क़द्र-ए-नज़र चाहता हूँ
अपने ही घर में बे-दख़्ल,बे-क़दरी के सख़ी-हसन में दफ़्न रहीं
और बसे क़द-आवर पेड़ चिनार केअपने झिल-मिल सब्ज़ ख़ुनुक सायों को
पेड़ तौर ब-दस्तज़-फ़र्क़ ता ब-क़दम एक फूल
किस क़दर है कठिन किस क़दर बे-अमाँलम्हा लम्हा सिसकती हूई ज़िंदगी
मैं सवाली नज़र आने लगासर-ता-ब-क़दम
کس قدر بے باک دل اس ناتواں پيکر ميں تھا شعلہ گردوں نورد اک مشت خاکستر ميں تھا
آہ! يہ عقل زياں انديش کيا چالاک ہے اور تاثر آدمي کا کس قدر بے باک ہے
कहीं गर्म होटल है पेशावरी काब-क़द्र-ए-सुकूँ वो दिलों का बहलना
किस क़दर अजीब हैदेखता नहीं मुझ को
ऐ ख़ुदातेरा लाचार बंदा
جب دکھاتي ہے سحر عارض رنگيں اپنا کھول ديتي ہے کلي سينہء زريں اپنا
يہ جہاد اللہ کے رستے ميں بے تيغ و سپر ہے جسارت آفريں شوق شہادت کس قدر
ज़िंदगी के सारे सफ़्हेकहीं भी कभी भी
रात इक सितारे नेतुम को देर तक देखा
किस क़दर कमज़ोर है मेरा वजूदकिस क़दर बे-मेहर है दुनिया मिरी
ज़बान चलती है कूचों में कार-ख़ानों मेंज़बाँ क़दम-ब-क़दम सीढ़ियों पे चढ़ती है
महताब-बदन गुलाब-सूरतसर-ता-ब-क़दम जमाल-ए-फ़ितरत
साल के इतने सारे दिनों मेंमुझे सिर्फ़ एक दिन चाहिए
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