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नज़्म
मिरे तमाम दोस्त अजनबी रफ़ाक़तों में गुम
मिरी नज़र में तेरे ख़द्द-ओ-ख़ाल तेरे ख़्वाब थे
अहमद फ़राज़
नज़्म
नोशी गिलानी
नज़्म
ख़ुमार-ए-शब में गुलाब-रुत की रफ़ाक़तों से महक रही हूँ
वो नर्म ख़ुशबू की तरह दिल में उतर रहा है
नाज़ बट
नज़्म
तारिक़ क़मर
नज़्म
गिरह तो जंक्शन है पटरियों का मुसाफ़िरों का नई-नवेली रफ़ाक़तों का
मोहब्बतों का अज़िय्यतों का
वज़ीर आग़ा
नज़्म
ये फ़स्ल रिश्तों की ज़ेहन-ओ-दिल पर उगी रहेगी
रफ़ाक़तों की घड़ी नज़र में खुली रहेगी
नसीर प्रवाज़
नज़्म
रज़ी हैदर
नज़्म
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साए हैं
तआ'रुफ़ रोग हो जाए तो उस का भूलना बेहतर