aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "رنجش_بے_جا"
बे-हिसी इफ़्लास और बुग़्ज़-ओ-अदावत तुझ में हैरंजिश-ए-बेजा-ओ-कीना और नफ़रत तुझ में है
बेजा मोहब्बत बेजा तकल्लुफ़दोनों ओछे लगते हैं
इस कठिन वक़्त मेंबेजा सी शिकायात न कर
हर नार अकड़ती तनती हैबेजा बूझे बनती है
इन फीके फीके लफ़्ज़ों परसब बेजा ख़ूब अकड़ते हैं
कश्मकश ज़िंदगी की ऐ 'अशरफ़'बेजा सा इल्तिफ़ात लगती है
और ‘अक़ीदों के होंटों की बेजा हँसीक़हक़हा बन गई
सभी फ़र्सूदा रस्मों सेहर इक दस्तूर-ए-बेजा से
मेरी बे-जा काविश मेरे सुलगते अरमाँफिर भड़केगी आग
नाहक़ का ये नाम न दोबेजा यूँ इल्ज़ाम न दो
उन परिंदों पे जिन को दरख़्तों से बेजा उड़ाया गयाएक नौहा लिखो
तू ही कह क्यों न मेरा दम घुटतातेरे बेजा हिजाब ने मारा
जाने-पहचाने रस्ते की आसानियाँउन में बेजा तहफ़्फ़ुज़ हज़र की तमन्ना है
बोले झुँझला के क्यूँ मियाँ साहबदाढ़ी रख कर ये हरकत-ए-बेजा
मगर ये ख़्वाहिश-ए-बेजाउसे ख़बर ही नहीं
बे-मुद्दआ करम है बेजा शिकायतें हैंअपने ही क़हक़हों पर बरसा रही है आँसू
प कहाँ हूँ अब तकहब्स-ए-बेजा का तसलसुल भी है तन्हाई भी
घर का हक़ है कि वोदूसरे घर की बे-जा मुदाख़लत से महफ़ूज़ रहे
ये दा'वा किया है इन्हें क़ैद रक्खाऔर अक्सर इन्हें हब्स-ए-बेजा में रख कर
जहान-ए-फ़ानी में फिर रहे होसँभल के चलने की बेजा कोशिश में गिर रहे हो
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