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नज़्म
जोश मलीहाबादी
नज़्म
मिरा हर शेर तन्हाई में उस ने गुनगुनाया है
सुनी हैं मैं ने अक्सर छुप के नग़्मा-ख़्वानियाँ उस की
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
जो बातें उम्र भर न सुनी होवें उस ने आह
वो बातें उस को आ के सुनाती हैं मुफ़्लिसी