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नज़्म
में हैं धनक क़ौसें न मसकारे से पलकों को शब की स्याही दी
न सुरमे से बनाई तूर सी आँखें
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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में हैं धनक क़ौसें न मसकारे से पलकों को शब की स्याही दी
न सुरमे से बनाई तूर सी आँखें
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