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नज़्म
इलाही ख़ैर वो हर दम नई बेदाद करते हैं
हमीं तोहमत लगाते हैं जो हम फ़रियाद करते हैं
राम प्रसाद बिस्मिल
नज़्म
तुम्हारा हूँ तुम अपनी बात मुझ से क्यूँ छुपाते हो
मुझे मालूम है जिस के लिए चक्कर लगाते हो
नज़ीर बनारसी
नज़्म
घंटी बाँध के चूहे जब बिल्ली से दौड़ लगाते थे
पेट पे दोनों हाथ बजा कर सब क़व्वाली गाते थे
गुलज़ार
नज़्म
सबीलें अब भी नन्हे-मुन्ने हाथों से लगाते हैं
वो मिट्टी के घड़ों पर सुर्ख़ गाबिस मल के