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नज़्म
साहिर लुधियानवी
नज़्म
वो हैअत-दाँ वो आलिम नाफ़-ए-शब में छत पे जाता था
रसद का रिश्ता सय्यारों से रखता था निभाता था
जौन एलिया
नज़्म
आमद-ए-सुब्ह के, महताब के, सय्यारों के गीत
तुझ से मैं हुस्न-ओ-मोहब्बत की हिकायात कहूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
संसार के सारे मेहनत-कश खेतों से मिलों से निकलेंगे
बे-घर बे-दर बे-बस इंसाँ तारीक बिलों से निकलेंगे
साहिर लुधियानवी
नज़्म
दलील-ए-सुब्ह-ए-रौशन है सितारों की तुनुक-ताबी
उफ़ुक़ से आफ़्ताब उभरा गया दौर-ए-गिराँ-ख़्वाबी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मैं ओस-क़तरों के आईनों में तुम्हें मिलूँगा
अगर सितारों में ओस-क़तरों में ख़ुशबुओं में न पाओ मुझ को
अमजद इस्लाम अमजद
नज़्म
कितनी आँखों को नज़र खा गई बद-ख़्वाहों की
ख़्वाब कितने तिरी शह-राहों में संगसार हुए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी
मुझ को रातों की सियाही के सिवा कुछ न मिला
साहिर लुधियानवी
नज़्म
शो'ला ये कम-तर है गर्दूं के शरारों से भी क्या
कम-बहा है आफ़्ताब अपना सितारों से भी क्या