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नज़्म
मेरे साथ हर हाल में राज़ी थी मगर ज़िंदगी में शामिल न हो पाई
प्यार की राह में जो मेरी हम-सफ़र थी
आमिर रियाज़
नज़्म
पसीने से गिर्दाब-ए-साहिल हुआ है?
ये ला का सफ़र ला रहेगा कि कुछ इस का हासिल हुआ है
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
(बहिश्त सिफ़्र-ए-आज़ीम लेकिन हमें वो गुम-गश्ता हिन्दसे हैं
बग़ैर जिन के कोई मुसावात क्या बनेगी
नून मीम राशिद
नज़्म
मज़्मूम और ना'श ख़ुर्दा खेत के जैसे
जिस्म जिन में शहवत की मिक़दार सिफ़र है अकड़ जाएँगे