aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ".bbaj"
लज़्ज़त सरोद की हो चिड़ियों के चहचहों मेंचश्मे की शोरिशों में बाजा सा बज रहा हो
याँ बूँद नहीं है डेवे मेंवो बाज-ब्याज की बात करे
ख़ुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़्वाब आएगाअपना अरमान बर-अफ़गन्दा-नक़ाब आएगा
ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहींकाँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में
बूंदों की झमझमावट क़तरात की बहारेंहर बात के तमाशे हर घात की बहारें
कि जैसे सैकड़ों बन-देवियों ने झूले परअदा-ए-ख़ास से इक साथ बाल खोल दिए
साज़ सब बज के खो गए हैंपायलें बज के सो गई हैं
ख़म-ब-ख़म महकती हैंऔर ज़मीं के होंटों पर
धनक के रंग नहीं सुरमई फ़ज़ाओं मेंउफ़ुक़ से ता-बा-उफ़ुक़ फाँसियों के झूले हैं
नुमाइश की वो ताब-ओ-तब अल्लाह अल्लाहवो बाब-ए-मुज़म्मिल पे जश्न-ए-चराग़ाँ
लम्बा चौड़ा शहर अचानकबन कर
इक शिकस्ता सा घर मिलेगाजिस की चौखट से बाम तक इक
यूँ राग सा छेड़े रहता था बहता हुआ पानी का धाराजैसे कोई जोगी रात गए गाता हो बजा कर इक तारा
रात आधी आ चुकी है बाम-ओ-दर ख़ामोश हैंअहल-ए-दौलत लैला-ए-इशरत से हम-आग़ोश हैं
सब लंगड़े लूले नाचेंगेगिर्दाब-ए-बला बन जाएँगे
चूड़ियाँ बज रही हैं हाथों कीआई आवाज़ उस की बातों की
ऐ ख़ुशा दिल अब तो सैलाब-ए-मोहब्बत आएगाआज तो बा-चश्म-ए-नम दिलदार है बरसात में
जनता का दिल बढ़ाती है छब्बीस जनवरीहैं बाम-ओ-दर पे आज तिरंगे लगे हुए
दिल में शहनाई बज रही थीकोई तो राजकुमार था
सुब्ह के पाँच बज चुके हैं औरचाँदनी जा चुकी है कमरे से
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