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नज़्म
ऐब्स्ट्रैक्ट आर्ट की देखी थी नुमाइश मैं ने
की थी अज़-राह-ए-मुरव्वत भी सताइश मैं ने
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
सुब्ह सवेरे सड़कों पर जाते ऊँटों के गले में
बोलती घंटी की आवाज़ हवा के तीरों से ज़ख़्मी है