aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ".kdmo"
इसे वास्ता क्या कम-ओ-बेश सेनशेब ओ फ़राज़ ओ पस-ओ-पेश से
दश्त के काम-ओ-दहन को दिन की तल्ख़ी से फ़राग़दूर दरिया के किनारे धुँदले धुँदले से चराग़
ख़बर न बुर्द ब-रुस्तम कसे कि सोहरा-बमन पूछ आलम-ए-काम-ओ-दहन नदीम मिरे
चश्मों के शीरीं आब सेलज़्ज़त-कशाँ काम-ओ-दहन
तभी से इस फल का ये कसीला ज़ाइक़ाआदमी के काम-ओ-दहन में हिर-फिर के आ रहा है
नज़्म बनाक़िस्सा-ए-काम-ओ-दहन का ग़म-ए-मतलूब बना
हम वफ़ा-केश बनेंख़िदमत-ए-क़ौम-ओ-वतन अपना सलीक़ा बन जाए
बोला कि ज़माने ने दिया नोश कभी नेशसदियाँ मुझे गुज़री हैं यहाँ तीन कम-ओ-बेश
है आश्ना मिरे काम-ओ-दहन से तल्ख़ी-ए-ग़मये ज़हर देख ले सौ मर्तबा पिला के मुझे
लज़्ज़त-ए-काम-ओ-दहन के लिए था
उखड़ी सफ़ेदी पे सीलन के धब्बेकम-ओ-बेश नज़रों से पोशीदा हैं
या हिसाब-ए-कम-ओ-बेश आज बराबर कर देया मिरी रूह मिरे जिस्म से बाहर कर दे
ये लुक़मा-ए-ख़ुश्क-ओ-हल्क़-फ़र्साकभी तो लज़्ज़त-ए-शिआ'र-ए-काम-ओ-दहन भी होता
तल्ख़ी-ए-काम-ओ-दहन दुनिया से जो मुझ को मिलीझलकियाँ उस की न आईं कुछ मिरी तहरीर में
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