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नज़्म
जो तू समझे तो आज़ादी है पोशीदा मोहब्बत में
ग़ुलामी है असीर-ए-इम्तियाज़-ए-मा-ओ-तू रहना
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कि जब तुम हाथ को मोड़ो नहीं होगी मुझे तकलीफ़
कि जब तुम आँख को फोड़ो तो चीख़ें भी न निकलेंगी
नील अहमद
नज़्म
उल्टी गंगा बहती है बहने दो उस को छोड़ो
अपने जीवन धारा को तुम सीधे रुख़ पर मोड़ो
मोहम्मद हाज़िम हस्सान
नज़्म
कमाल अहमद सिद्दीक़ी
नज़्म
जिस में कि ख़ूब-ओ-ज़िश्त का मद्द-ओ-जज़र है साफ़ साफ़
मंज़र-ए-दोज़ख़-ओ-बहिश्त पेश-ए-नज़र है साफ़ साफ़
मीर यासीन अली ख़ाँ
नज़्म
इफ़्तेख़ार जालिब
नज़्म
ख़ुदी को गर मिटाएगा ख़ुदा भी मिल ही जाएगा
उठाया चाहिए दिल से हिजाब-ए-मा-ओ-तू पहले