aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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ये इस्तिग़्ना है पानी में निगूँ रखता है साग़र कोतुझे भी चाहिए मिस्ल-ए-हबाब-ए-आबजू रहना
आबजू के हसीं किनारों परख़्वाब-आलूद रहगुज़ारों पर
मोहब्बत डाइरी हरगिज़ नहीं है आब-जू हैजो दिलों के दरमियाँ बहती है ख़ुश्बू है
हयात की आबजू पस-ए-पुश्त बह रही हैतुम्हारी जेबें मुनाफ़िक़त से अटी हुई हैं
ख़ुदी में डूबने वालों के 'अज़्म-ओ-हिम्मत नेइस आबजू से किए बहर-ए-बे-कराँ पैदा
वो गुल-पोश रातें वो दिलकश नज़ारेमनाज़िर सिमटते हुए आबजू में
मैं ने कहा कि चू से अगर है मुराद जूफिर यूँ कहो कि ता-ब-लब-ए-आब-जू गई
लब-ए-आबजू थी फ़ज़ा ग़ज़बवो बहार की थी हवा अजब
ज़बाँ पर हैं मोहब्बत के तरानेकनार-ए-आबजू है और मैं हूँ
कनार-ए-आबजू मह-रूतका करता था घंटों महवियत से
डूब जातीआबजू के
लम्हा-ए-माकूस हैआब-जू-ए-ख़्वाब है पैहम रवाँ
फ़ज़ा में आसमानी नूर की इक लूट मचती हैकनार-ए-आबजू से जब ख़िरामाँ तू गुज़रती है
हरे हो जाएँगे इक दिन तिरी उम्मीद के बूटेचमन में आँसूओं की तू बहा दे आबजू पहले
कनार-ए-आबजू सेवो जहाँ सय्याल चाँदी बह रही थी
ज़रा सी आब-जू नदीकि ला-हुदूद बहर हो
मीठी मीठी सी तपिशफूल शबनम शफ़क़ आबजू चाँदनी
ये ज़िंदगी है जावेदाँमिसाल-ए-आब-जू रवाँ
आब-जू की नर्म-रौ उदासियों में रेज़ा-रेज़ातुम को याद कर के
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