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नज़्म
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
दिल शाद किया और मोह लिया ये, जौबन पाया होली ने
कुछ तबले खटके ताल बजे कुछ ढोलक और मुर्दंग बजी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
कभी टेबल पे रख के पाँव सो जाना भी छुट्टी है
कभी दफ़्तर से उठ कर गोल हो जाना भी छुट्टी है