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नज़्म
मजीद अमजद
नज़्म
कि शिद्दत भूक की और प्यास की ऐसे मिटाते हैं
ब-ज़ोम-ए-रोज़ा अबना-ए-वतन को काट खाते हैं
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
अब तो लाज़िम है कि हों बेदार अबना-ए-वतन
हो दिलों में जज़्बा-ए-मिल्लत-परस्ती जोश-ज़न
सफ़ीर काकोरवी
नज़्म
अज़रा नक़वी
नज़्म
कर रहा है सैर-ए-दुनिया बन के अब जासूस तू
आह अब्ना-ए-वतन से ख़ाक हो मानूस तू