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नज़्म
आग़ोश-ए-एहतियात में रख लूँ जिगर कहीं
डरता हूँ ले उड़े न किसी की नज़र कहीं
राज्य बहादुर सकसेना औज
नज़्म
फिर भी आग़ोश-ए-तमन्ना में, तड़प उठता हूँ
चेहरे चेहरे पे बिखरती हुई, आवाज़ों में
ख़ालिद मलिक साहिल
नज़्म
नून मीम राशिद
नज़्म
खुली है मुझ को लेने के लिए आग़ोश-ए-आज़ादी
ख़ुशा कि हो गया महबूब का दीदार फाँसी से
सरदार नौबहार सिंह साबिर टोहानी
नज़्म
मेरी हर फ़तह में है एक हज़ीमत पिन्हाँ
हर मसर्रत में है राज़-ए-ग़म-ओ-हसरत पिन्हाँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
रात की ज़ुल्फ़ मो'अत्तर न बदन शो'ला-फ़गन
सर्द आग़ोश-ए-फ़ज़ा चाँद के माथे पे थकन