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नज़्म
इसी रविश पे है क़ाइम मिज़ाज-ए-दीदा-ओ-दिल
लहू में अब भी तड़पती हैं बिजलियाँ कि नहीं
मुस्तफ़ा ज़ैदी
नज़्म
अब यही कोशिश है दिल से ऐ मिरी अर्ज़-ए-वतन
तेरी पेशानी पे अब कोई शिकन आने न पाए
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
अगर इस मज्लिस-गेती में औरों को रुलाता है
दिल-ए-दर्द-आश्ना-ओ-दीदा-ए-ख़ूँ-बार पैदा कर
अज़ीमुद्दीन अहमद
नज़्म
है कुल की ख़बर उन को मगर जुज़ की ख़बर गुम
ये ख़्वाब हैं वो जिन के लिए मर्तबा-ए-दीदा-ए-तर हेच
नून मीम राशिद
नज़्म
इम्तिहान-ए-दीदा-ए-ज़ाहिर में कोहिस्ताँ है तू
पासबाँ अपना है तू दीवार-ए-हिन्दुस्ताँ है तू
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
सुकून-ए-दीदा-ए-तिश्ना हैं मौजा-हा-ए-सराब
ख़ुदा करे कि न टूटे तिलिस्म-ए-लात-ओ-मनात
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
दीदा-ए-अफ़्लाक ने देखे बहुत इंक़िलाब
अहद-ए-कुहन के निशाँ महव हुए मिस्ल-ए-ख़्वाब