aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aavarde"
इश्क़ को इश्क़ की आशुफ़्ता-सरी को छोड़ारस्म-ए-सलमान ओ उवैस-ए-क़रनी को छोड़ा
तुम अपनी आँख की बस्ती में फिर से इक नया मौसम उतरने दोमिरे ख़्वाबों को मरने दो
कभी जो आवारा-ए-जुनूँ थे वो बस्तियों में फिर आ बसेंगेबरहना-पाई वही रहेगी मगर नया ख़ारज़ार होगा
किस हाल में हैं यारान-ए-वतनआवारा-ए-ग़ुर्बत को भी सुना
रोज़ जब धूप पहाड़ों से उतरने लगतीकोई घटता हुआ बढ़ता हुआ बेकल साया
अपना ग़ुस्सा उतारने के लिएफ़ोन पर शब गुज़ारने के लिए
ज़मीं से नक़्श मिटाने को ज़ुल्म ओ नफ़रत काफ़लक से चाँद सितारे उतारने के लिए
अहद-ए-गुम-गश्ता की तस्वीर दिखाती क्यूँ होएक आवारा-ए-मंज़िल को सताती क्यूँ हो
सब्ज़ पानी की सय्याल परछाइयाँलम्हा लम्हा बंद में उतरने लगीं
ख़्वाब ही ख़्वाब में बेताब नज़र होने लगीअदम-आबाद-ए-जुदाई में सहर होने लगी
ये सर-ज़मीन से आकाश की परस्तिश-गाहउतारते हैं तिरी आरती सितारा ओ माह
वो पैवंद-ए-ज़मीं हो करयूँही ज़ोर-आवरों के लिए रास्ता बनाते हैं
अपने दरवाज़े के उतरते रोग़न कोअपने अश्कों से सैक़ल कर लूँ
वक़्त को आते न जाते न गुज़रते देखान उतरते हुए देखा कभी इल्हाम की सूरत
ख़ंजर आज़ाद हैं सीनों में उतरने के लिएमौत आज़ाद है लाशों पे गुज़रने के लिए
आसेब थे जितनेऔर जंगल से गुज़रते हुए रहगीरों ने गर्दन में उतरते
आसमानों से फ़रिश्ते भी उतरते ही रहेनेक बंदे भी ख़ुदा का काम करते ही रहे
ख़ला के गहरे समुंदरों मेंउतारने को हैं अपने बेड़े
अकड़ने लगी उस की हंटरी पूँछऔर आँखों में बस ख़ून उतरने लगा
देख किस प्यार से अनवार-ए-सहर चूमते हैंमस्जिद-ए-शहर के मीनारों को
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