aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "abr-e-bahaar"
उठाओ साज़ कि अब्र-ए-बहार बाक़ी हैअभी तो बज़्म में कैफ़-ओ-ख़ुमार बाक़ी हैअभी अभी तो फ़ज़ा मुस्कुरा के जागी हैअभी तो शौक़-ए-दिल-ए-बादा-ख़्वार बाक़ी हैअभी न जाओ बहारें भी लौट जाएँगीअभी तो सेहन-ए-चमन का निखार बाक़ी हैअभी तो अंजुमन-ए-मेहर-ओ-माह बिकने दोअभी नक़ाब-ए-रुख़-ए-हुस्न-ए-यार बाक़ी हैअभी न शम्अ बुझाओ मिरे शबिस्तान कीथकी सी आस सर-ए-रहगुज़ार बाक़ी हैअभी तो जाग रही है निगाह-ए-अफ़्सुर्दाअभी किसी का उसे इंतिज़ार बाक़ी हैअभी तो दूर कहीं बज रही है शहनाईकिसी हसीन दुल्हन का सिंघार बाक़ी हैअभी तो साज़ है सरगम है रात अपनी हैफ़ज़ा हसीं है जहाँ नग़्मा-बार बाक़ी हैअभी मुझे न कहो दास्तान-ए-ग़म ऐ दोस्तकि ज़िंदगी पे अभी ए'तिबार बाक़ी हैकिसी ने छेड़ दिए आह फिर ख़िज़ाँ के गीतसिसक रही है तमन्ना तड़प उठा संगीत
हर साल-ए-नौ को मिल केये रस्म है बनाईलेकिन है याद रखनाजो साल पिछ्ला गुज़राजो हादसे हुए हैंजो फ़ासले हुए हैंकुछ राब्ते बढ़े हैंकुछ सिलसिले कटे हैंमहफ़ूज़ पहले कर लेंमज़बूत पहले कर लेंफिर ख़ुश-गवार लम्हेख़ुशबू भरी वो बातेंसब चाँदनी की रातेंयादों की कहकशाएँकुंदन सी आत्माएँसब चंद्रमा से चेहरेनिखरे हुए सवेरेआशा के दीप भी होंसोचों के सीप भी होंमख़मूर हों घटाएँमसहूर हों फ़ज़ाएँआँचल धनक से बिखरेंसाथी न कोई बिछ्ड़ेंबाग़-ओ-बहार मन होमन में यही लगन होआओ कि आज के दिनफिर एक बार मिल के तज्दीद-ए-अहद कर लेंइस देस की ज़मीं मेंख़ुशियाँ समर लगाएँआओ अमर हो जाएँ
मैं क़ैदी तितली हूँ तेरीसब रंग बहार के हैं तुझ सेजब बर्फ़ के मौसम आएँगेहम याद के साज़ बजाएँगेफिर ख़्वाब के तेशे लाएँगेता'मीर-ए-मोहब्बत करने कोतस्ख़ीर-ए-मोहब्बत करने को
जीने के सामान 'अजबप्यार के हैं अरमान 'अजबजब तू मुझ को याद आएचुप रह कर जी घबराएबात करूँ तो पाबंदीमेरी क़िस्मत की मानिंदआँखें भी मेरी अंधीचारों ओर है सन्नाटाया कान ही मेरे बहरे हैंपिंजरे से क्या बाहर आऊँहर जानिब तो पहरे हैं
माह-ओ-अंजुम कँवल सितारे सुनोजब वो मह-वश नहीं है अपने पासबाद-ए-अब्र-ए-बहार है बे-कैफ़चाँदनी मुज़्महिल है चाँद उदासउस की फ़ुर्क़त का किस क़दर एहसास
दुनिया-ए-रंग-ओ-बू से मोहब्बत नहीं रहीअब गुल-रुख़ान-ए-दहर की चाहत नहीं रहीया-रब ये किस मक़ाम पर अब आ गया हूँ मैंबेज़ार दिल को उन से भी उल्फ़त नहीं रहीबीमार-ए-ग़म की चारागरी अब न कीजिएइस को किसी इलाज की हाजत नहीं रहीआज़ुर्दा मुझ को देख के कहते हैं सब रफ़ीक़क्या हो गया तुम्हें कि बशाशत नहीं रहीजो कुछ कहा किसी ने वो चुपके से सुन लियादुनिया से अब उलझने की हिम्मत नहीं रहीदुश्वारी-ए-हयात से है क़ाफ़िया ही तंगऐसे में शेर कहने की फ़ुर्सत नहीं रहीतक़दीर ने भी अपनी नज़र मुझ से फेर लीजब से तुम्हारी चश्म-ए-इनायत नहीं रहीइस आलम-ए-वजूद पे तन्क़ीद क्या करूँअब मुझ को ऐब-जूई की आदत नहीं रहीजल्वा हर एक शय में है परवरदिगार कादिल को किसी भी चीज़ से नफ़रत नहीं रहीतेरी तजल्लियों से हुआ दिल भी जाम-ए-जमइस आइने पे गर्द-ए-कुदूरत नहीं रहीया दूर भागता था मैं अपनों के नाम सेया दुश्मनों से भी मुझे वहशत नहीं रहीज़र है कसौटी अज़्मत-ए-इंसाँ की आज-कलइल्म-ओ-हुनर की अब कोई वक़अत नहीं रहीतहज़ीब-ए-नौ ने देखिए क्या गुल खिलाए हैंमफ़क़ूद है ख़ुलूस मुरव्वत नहीं रहीगो औरतों में जज़्बा-ए-ईसार ख़त्म हैमर्दों में भी हमिय्यत-ओ-ग़ैरत नहीं रहीबाज़ार गर्म रहता है मक्र-ओ-फ़रेब कासिद्क़-ओ-सफ़ा की अब कोई क़ीमत नहीं रहीहै आदमी की ज़ात से लर्ज़ां ख़ुद आदमीअहल-ए-जहाँ के दिल में उख़ुव्वत नहीं रहीलाहौर क्या छुटा कि ज़माना बदल गयाअर्बाब-ए-ज़ौक़-ओ-शौक़ की सोहबत नहीं रहीक्या बात है कि अब तिरे शे'रों में ऐ 'बहार'वो सोज़ वो तड़प वो हरारत नहीं रही
आख़िर इस अंदाज़ पर रहमत को प्यार आ ही गयामय-कदे पर झूम कर अब्र-ए-बहार आ ही गया
लेना है जो अब काम शकर-रेज़ क़लम सेतौसीफ़-ए-ख़म-ए-अबरू-ए-जानाँ से है दुश्वार
ज़ुल्मत के हर निशान मिटा कर रहूँगा मैंपर्दे जहालतों के उठा कर रहूँगा मैंगुल हो चुके निज़ाम-ए-कोहन के दिए तमामकोई नया चराग़ जला कर रहूँगा मैंशाइ'र हूँ इंक़लाब की धुन है मुझे मुदामबिगड़ी हुई रविश को बना कर रहूँगा मैंमेरी नवा सुनेंगे जवानान-ए-सरफ़रोशख़्वाबीदा ग़ैरतों को जगा कर रहूँगा मैंलौ दे उठेंगे क़ौम के जज़्बात गर्म गर्मसीने में सब के आग लगा कर रहूँगा मैंअपनी फ़ुग़ान-ए-नीम-शबी की मुझे क़समहिन्दोस्ताँ को ख़ुल्द बना कर रहूँगा मैंइस कश्मकश में जान की बाज़ी लगाऊँगादुनिया को ये भी खेल दिखा कर रहूँगा मैंदेना वतन पे जान हयात-ए-दवाम हैये राज़ हर बशर को बता कर रहूँगा मैंअहल-ए-जफ़ा से जंग जवानों का फ़र्ज़ हैइस फ़र्ज़ को 'बहार' निभा कर रहूँगा में
चराग़ राह में उस के अमल से जलने लगेलो आज सुब्ह-ए-शब-ए-इंतिज़ार आ ही गईफ़ज़ा महकने लगी दिल-नवाज़ फूलों सेदयार-ए-हिन्द में फ़स्ल-ए-बहार आ ही गई
किसी पे करते हैं अब्र-ए-बहार को क़ुर्बांकिसी पे क़त्ल मह-ए-ताबनाक करते हैंकिसी पे होती है सरमस्त शाख़-सार-ए-दो-नीमकिसी पे बाद-ए-सबा को हलाक करते हैं
मगर कुछ सोच कर यारोउठा लेता हूँ मैं उस कोऔर बाहर छोड़ आता हूँ
आज दिल में वीरानीअब्र बन के घिर आईआज दिल को क्या कहिएबा-वफ़ा न हरजाईफिर भी लोग दीवानेआ गए हैं समझानेअपनी वहशत-ए-दिल केबुन लिए हैं अफ़्सानेख़ुश-ख़याल दुनिया नेगर्मियाँ तो जाती हैंवो रुतें भी आतीं हैंजब मलूल रातों मेंदोस्तों की बातों मेंजी न चैन पाएगाऔर ऊब जाएगाआहटों से गूँजेगीशहर-ए-दिल की पहनाईऔर चाँद रातों मेंचाँदनी के शैदाईहर बहाने निकलेंगेआज़माने निकलेंगेआरज़ू की गहराईढूँडने को रुस्वाईसर्द सर्द रातों कोज़र्द चाँद बख़्शेगाबे-हिसाब तन्हाईबे-हिजाब तन्हाईशहर-ए-दिल की गलियों में
शहर-ए-दिल की गलियों मेंशाम से भटकते हैंचाँद के तमन्नाईबे-क़रार सौदाईदिल-गुदाज़ तारीकीजाँ-गुदाज़ तन्हाईरूह-ओ-जाँ को डसती हैरूह-ओ-जाँ में बस्ती हैशहर-ए-दिल की गलियों मेंताक शब की बेलों परशबनमीं सरिश्कों कीबे-क़रार लोगों नेबे-शुमार लोगों नेयादगार छोड़ी हैइतनी बात थोड़ी हैसद-हज़ार बातें थींहीला-ए-शकेबाईसूरतों की ज़ेबाईकामतों की रा'नाईउन सियाह रातों मेंएक भी न याद आईजा-ब-जा भटकते हैंकिस की राह तकते हैंचाँद के तमन्नाईये नगर कभी पहलेइस क़दर न वीराँ थाकहने वाले कहते हैंक़र्या-ए-निगाराँ थाख़ैर अपने जीने काये भी एक सामाँ थाआज दिल में वीरानीअब्र बन के घिर आईआज दिल को क्या कहिएबा-वफ़ा न हरजाईफिर भी लोग दीवानेआ गए हैं समझानेअपनी वहशत-ए-दिल केबुन लिए हैं अफ़्सानेख़ुश-ख़याल दुनिया नेगर्मियाँ तो जाती हैंवो रुतें भी आती हैंजब मलूल रातों मेंदोस्तों की बातों मेंजी न चैन पाएगाऔर ऊब जाएगाआहटों से गूँजेगीशहर-ए-दिल की पिन्हाईऔर चाँद-रातों मेंचाँदनी के शैदाईहर बहाने निकलेंगेआरज़ू की गीराईढूँडने को रुस्वाईसर्द सर्द रातों कोज़र्द चाँद बख़्शेगाबे-हिसाब तन्हाईबे-हिजाब तन्हाईशहर-ए-दिल की गलियों में
छोटी सी बिल्लूछोटा सा बस्ताठूँसा है जिस मेंकाग़ज़ का दस्तालकड़ी का घोड़ारुई का भालूचूरन की शीशीआलू कचालूबिल्लू का बस्ताजिन की पिटारीजब इस को देखोपहले से भारीलट्टू भी इस मेंरस्सी भी इस मेंडंडा भी इस मेंगिल्ली भी इस मेंऐ प्यारी बिल्लूये तो बताओक्या काम करनेइस्कूल जाओउर्दू न जानोइंग्लिश न जानोकहती हो ख़ुद कोबिल्क़ीस बानोउम्र की इतनीकच्ची नहीं होछे साल की होबच्ची नहीं होबाहर निकालोलकड़ी का घोड़ाये लट्टू रस्सीये गिल्ली डंडागुड़िया के जूतेजंपर जुराबेंबस्ते में रक्खोअपनी किताबेंमुँह न बनाओइस्कूल जाओऐ प्यारी बिल्लूऐ प्यारी बिल्लू
हर एक फूल हुआ रंग-बार होली मेंहर एक शाख़ है सूरत-निगार होली मेंगुलों से मौज-ए-शफ़क़ रंग खेलने आईअजब है अर्ज़-ओ-समा पर बहार होली मेंवो सुर्ख़-पोश गुलिस्ताँ में रंग खेला हैगुल-ओ-समन पे है तुर्फ़ा निखार होली मेंहर एक चीज़ से रंग-ए-वफ़ा टपकता हैशहीद-ए-इश्क़ की है यादगार होली मेंकुछ इस तरह से हुई गुल पे शबनम-अफ़्शानीक़बा-ए-गुल है जवाहर-निगार होली मेंजिधर निगाह उठी सुर्ख़ियाँ नज़र आईंहर एक शय है फ़साना-निगार होली मेंहै काएनात में जोश-ए-नुमू की जुम्बिश सेहर एक ज़र्रे का दिल बे-क़रार होली मेंक़दम के नीचे है फ़र्श-ए-ज़मुर्रदीं 'रा'ना'है सर पे साया-ए-अब्र-ए-बहार होली में
मारा हुआ हूँ गो ख़लिश-ए-इंतिज़ार कामुश्ताक़ आज भी हूँ पयाम-ए-बहार का
मुतरिब भी है शराब भी अब्र-ए-बहार भीशीराज़ बन गया है शबिस्तान-ए-लखनऊ
आओ कि मर्ग-ए-सोज़-ए-मोहब्बत मनाएँ हमआओ कि हुस्न-ए-माह से दिल को जलाएँ हमख़ुश हूँ फ़िराक़-ए-क़ामत-ओ-रुख़्सार-ए-यार सेसर्व-ओ-गुल-ओ-समन से नज़र को सताएँ हमवीरानी-ए-हयात को वीरान-तर करेंले नासेह आज तेरा कहा मान जाएँ हमफिर ओट ले के दामन-ए-अब्र-ए-बहार कीदिल को मनाएँ हम कभी आँसू बहाएँ हमसुलझाएँ बे-दिली से ये उलझे हुए सवालवाँ जाएँ या न जाएँ न जाएँ कि जाएँ हमफिर दिल को पास-ए-ज़ब्त की तल्क़ीन कर चुकेंऔर इम्तिहान-ए-ज़ब्त से फिर जी चुराईं हमआओ कि आज ख़त्म हुई दास्तान-ए-इश्क़अब ख़त्म-ए-आशिक़ी के फ़साने सुनाएँ हम
मन भी सूनाआँगन भी सूनाआँगन सूनासूना सब संसार पड़ासूनी अब ये सेज पड़ी हैकब तू आ कर प्रेम बिराजेअँधियारे नैनन में छाएद्वारे द्वारे ढूँढ के आएफिर भी तेरा ठोर न जानाकठिन बड़ा है तुझ को पाना
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