aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "abr-e-bahaar"
उठाओ साज़ कि अब्र-ए-बहार बाक़ी हैअभी तो बज़्म में कैफ़-ओ-ख़ुमार बाक़ी है
बाद-ए-अब्र-ए-बहार है बे-कैफ़चाँदनी मुज़्महिल है चाँद उदास
फिर ओट ले के दामन-ए-अब्र-ए-बहार कीदिल को मनाएँ हम कभी आँसू बहाएँ हम
ग़म न कर है नक़ीब-ए-अब्र-ए-बहारख़ुश्की-ए-मौसम-ए-ज़मिस्तानी
साथी न कोई बिछ्ड़ेंबाग़-ओ-बहार मन हो
क्या बात है कि अब तिरे शे'रों में ऐ 'बहार'वो सोज़ वो तड़प वो हरारत नहीं रही
वो झूम-झूम के अब्र-ए-बहार का आनावो बिजलियों की तड़प और वो इज़्तिराब तिरा
हर एक वस्ल-ए-ख़ुदा-वंद की उमंग लिएकिसी पे करते हैं अब्र-ए-बहार को क़ुर्बां
आख़िर इस अंदाज़ पर रहमत को प्यार आ ही गयामय-कदे पर झूम कर अब्र-ए-बहार आ ही गया
लेना है जो अब काम शकर-रेज़ क़लम सेतौसीफ़-ए-ख़म-ए-अबरू-ए-जानाँ से है दुश्वार
देना वतन पे जान हयात-ए-दवाम हैये राज़ हर बशर को बता कर रहूँगा मैं
फ़ज़ा महकने लगी दिल-नवाज़ फूलों सेदयार-ए-हिन्द में फ़स्ल-ए-बहार आ ही गई
है यही अब्र-ए-नौ-बहारबाद-ए-ख़िज़ाँ से हम-किनार
क़दम के नीचे है फ़र्श-ए-ज़मुर्रदीं 'रा'ना'है सर पे साया-ए-अब्र-ए-बहार होली में
अब्र बन के घिर आईआज दिल को क्या कहिए
आज दिल में वीरानीअब्र बन के घिर आई
मारा हुआ हूँ गो ख़लिश-ए-इंतिज़ार कामुश्ताक़ आज भी हूँ पयाम-ए-बहार का
बाला-ए-कोह साया-ए-अब्र-ए-बहार मेंपरवीन-ओ-माहताब का काशाना चाहिए
वो झूम झूम के अब्र-ए-बहार का आनावो बिजलियों की तड़प और वो इज़्तिराब तिरा
मुतरिब भी है शराब भी अब्र-ए-बहार भीशीराज़ बन गया है शबिस्तान-ए-लखनऊ
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