aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aka.D"
इसी मामूरे में आबाद थे यूनानी भीइसी दुनिया में यहूदी भी थे नसरानी भी
कुछ ज़रा मुश्किल से खुलने वाला वो शीशम का दरवाज़ाकि जैसे कोई अक्खड़ बाप
कि जैसे हाथ अबद रख दे दोश-ए-तिफ़्ली परहर एक लम्हा के रख़नों से झाँकती सदियाँ
उखड़ गई साँस पत्तियों कीचली गईं ऊँघ में हवाएँ
और वो आँखे दिखाएँ तो अकड़ कर चीख़ेंउन को दीवाना बनाएँ तो मज़ा आ जाए
बड़ पीपल आँब नीब छुआरा खजूर ताड़सब ख़ाक होंगे जब कि फ़ना डालेगी उखाड़
सुनकुछ पत्ते और पत्तों के साथ कुछ हवा उखड़ गई है
कोई इकाईशजर हजर हो कि ज़ी-नफ़्स हो
फैलने लगते हैंतुम्हारा जिस्म अकड़ जाता है
अक्सर नज़्म अकड़ जाती है
दिलों के धागे उखड़ गए हैंशफ़ीक़ आँसू नहीं बचे हैं ग़मों के लहजे बदल गए हैं
कश्ती से लड़ रहे हैंतख़्ते उखड़ रहे हैं
वक़्त का चाक चल रहा हैज़मीन की साँस उखड़ रही है
दीवारों के पलसतर उखड़ जाता हैकाग़ज़, शोर करना भूल जाते हैं
अकड़ शाह बेहद परेशान थाकि अब जा रहा माह-ए-शाबान था
सब कुछ उखाड़ के ले गयाक्या उसे भी?
लेकिन मेरे पास वक़्त और हँसी कम हैबदन से दिल उखड़ गया है
भिंडी बोली टिंडे सेअकड़ रहे हो ठंडे से
तो उन्हें जड़ों से उखाड़ फेंकोतुम्हारी आँखों में ज़र्द वीरानियाँ बसी हैं
तहमद से बाहर पाँव फैला केअकड़ कर बैठता
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