आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "amar"
नज़्म के संबंधित परिणाम "amar"
नज़्म
डस लेगी जान ओ दिल को कुछ ऐसे कि जान ओ दिल
ता-उम्र फिर न कोई हसीं ख़्वाब बुन सकें
साहिर लुधियानवी
नज़्म
ख़ास तरह की सोच थी जिस में सीधी बात गँवा दी
छोटे छोटे वहमों ही में सारी उम्र बिता दी
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
नज़्म
बोले ये इब्न-ए-उम्र सब से मुख़ातिब हो कर
इस में कुछ वालिद-ए-माजिद का नहीं जुर्म ओ क़ुसूर