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नज़्म
तेरी तो दौलत के बाइ'स बेगाने तुझे अपनाते हैं
और मेरी ग़ुर्बत के बाइ'स अपने भी मुझे ठुकराते हैं
सलाम संदेलवी
नज़्म
जन्नत-ए-शौक़ थी बेगाना-ए-आफ़ात-ए-सुमूम
दर्द जब दर्द न हो काविश-ए-दरमाँ मालूम
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
इन को अपनाने की ख़्वाहिश उन्हें पाने की तलब
शौक़-ए-बेकार सही सई-ए-ग़म-ए-अंजाम नहीं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
क़दम पर लोटती है अज़्मत-ए-ताज-ए-सुलैमानी
अज़ल से मो'तक़िद है महफ़िल-ए-नूरानियाँ उस की
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
हैं जूया किसी अज़्मत-ए-ना-रसा के
उन्हें क्या ख़बर कैसा आसेब-ए-मुबरम मेरे ग़ार सीने पे था
नून मीम राशिद
नज़्म
तुझ को अपनाने की हिम्मत है न खो देने का ज़र्फ़
कभी हँसते कभी रोते हुए सो जाता हूँ मैं