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नज़्म
अपने गुलहा-ए-अक़ीदत पेश करती हूँ तुझे
मुख़्तसर ये है मोहब्बत पेश करती हूँ तुझे
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
तिरे लुत्फ़-ओ-अता की धूम सही महफ़िल महफ़िल
इक शख़्स था इंशा नाम-ए-मोहब्बत में कामिल
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
शाहिद-ए-मा'नी-ए-असरार-ए-ज़ुहूर-ए-क़ुदरत
सब पे रौशन था कि वो ख़ास था नूर-ए-क़ुदरत
बिस्मिल इलाहाबादी
नज़्म
क़य्यूम नज़र
नज़्म
तेरा चेहरा है कि तख़्लीक़-ए-मह-ओ-महर का राज़
तेरी आँखें हैं कि असरार-ए-दो-आलम जैसे
प्रेम वारबर्टनी
नज़्म
जिस पे खुलते नहीं असरार-ए-तअ'ल्लुक़ न मिज़ाज
अपनी ही धन में सुबुक-ख़ेज़ चला जाता है
इलियास बाबर आवान
नज़्म
और ज़िंदगी काएनात की दूसरी बड़ी सच्चाई
मौज अंदर मौज समुंदर की तरह असरार-ए-ख़ज़ाइन लिए हुए
जावेद नदीम
नज़्म
हक़ीक़ी इश्क़ का जज़्बा है दिल में जिस की बरकत से
हयात और मौत के असरार-ए-उर्यां देख लेता हूँ
लाला अनूप चंद आफ़्ताब पानीपति
नज़्म
सच है असरार-ए-हक़ीक़त का ख़ज़ाना तू है
हाल-ओ-मुस्तक़बिल-ओ-माज़ी का ज़माना तू है