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नज़्म
जो होता और कोई तो निकल जाता वो ग़ुस्से में
मगर हम बा-दिल-ए-ना-ख़्वास्ता बा-चश्म-ए-नम निकले
ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी
नज़्म
ख़्वाबों के गुलिस्ताँ की ख़ुश-बू-ए-दिल-आरा है
या सुब्ह-ए-तमन्ना के माथे का सितारा है
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
इक दिल-ए-शोला-ब-जाँ साथ लिए जाता हूँ
हर क़दम तू ने कभी अज़्म-ए-जवाँ बख़्शा था!
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
दिल से बस होगी यही हर्फ़-ए-विदाअ की सूरत
लिल्लाहिल-हम्द ब-अनजाम-ए-दिल-ए-दिल-ज़दगाँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
घर ऐ दिल-ए-बे-क़रार ज़िंदाँ से कम नहीं क़ैद कौन काटे
हसीन सरमा का चाँद दीवाना-वार को बुला रहा है
अब्दुल अज़ीज़ फ़ितरत
नज़्म
ऐसों का ग़म ग़लत इक दो घड़ी करती है तू
दस्त-ए-शफ़क़त दिल-ए-पज़-मुर्दा पे धरती है तू