आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ba-ra.ng-e-abr-e-ravaa.n"
नज़्म के संबंधित परिणाम "ba-ra.ng-e-abr-e-ravaa.n"
नज़्म
है ज़मीं पर इस तरह क़ामत के साये का निशाँ
आसमाँ पर जिस तरह हो पारा-ए-अब्र-ए-रवाँ
नख़्शब जार्चवि
नज़्म
कभी साथ अपने उस के आस्ताँ तक मुझ को तू ले चल
छुपा कर अपने दामन में ब-रंग-ए-मौज-ए-बू ले चल
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
वो मलका जो ब-रंग-ए-अज़्मत-ए-शाहाना रहती थी
यही वादी है वो हमदम जहाँ रेहाना रहती थी