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नज़्म
इस के तार बिखर जाएँगे कब मेरा दिल माने
दिल पे रहेगा कब तक जादू फेरी वाला जाने
सज्जाद बाक़र रिज़वी
नज़्म
इक ख़ुशबू दर्द-ए-सर की मुरझाई कलियों को खिलाए जाती है
ज़ेहन में बिच्छू उम्मीदों के डंक लगाते हैं
बाक़र मेहदी
नज़्म
क्या ख़ता मेरी कि जो बच्चा हुआ जुड़वाँ हुआ
और मआ हम-ज़ाद आजिज़ ही के घर मेहमाँ हुआ
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
आँधियाँ आसमानों का नौहा ज़मीं को सुनाती हैं
अपनी गुलू-गीर आवाज़ में कह रही हैं,