आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "baar-e-minnat-e-qaatil"
नज़्म के संबंधित परिणाम "baar-e-minnat-e-qaatil"
नज़्म
यही दस बीस अगर हैं कुश्तागान-ए-ख़ंजर-अंदाज़ी
तो मुझ को सुस्ती-ए-बाज़ू-ए-क़ातिल की शिकायत है
शिबली नोमानी
नज़्म
है 'वासिय्या' भी तिरी मरहून-ए-मिन्नत गोमती
फिर लिखूँगी और मिल जाए जो फ़ुर्सत गोमती