aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "baarish-e-sa.ng-e-malaamat"
दोस्तो ख़त्म हुई दीदा-ए-तर की शबनमथम गया शोर-ए-जुनूँ ख़त्म हुई बारिश-ए-संग
संग-रेज़ो की करो बारिश कि फिरसूरत-ए-ख़ाशाक-ओ-ख़स
हुजूम-ए-संग-ए-अना और ज़ब्त-ए-पैहम नेमिसाल-ए-रेग-ए-रवाँ बे-क़रार रक्खा है
बारिश-ए-संग-ए-अलम अपना मुक़द्दर ठहरीराहत-ए-दर्द मिली लुत्फ़-ओ-करम के बदले
آزاد کي رگ سخت ہے مانند رگ سنگمحکوم کي رگ نرم ہے مانند رگ تاک
हम को जो मिल गया तसलसुल सेनज़र-ए-तूफ़ान-ए-संग तो न करें
शर्क़ से ग़र्ब तकअर्श से फ़र्श तक
बद-आमालियों और बद-चलनियों परकिसी ने न संग-ए-मलामत ही फेंका
जिस तरह बंद दरीचों पे गिरे बारिश-ए-संग
अब किसी चश्म-ए-निगह-दार का ख़तरा भी नहींवक़्त के हाथ में अब संग-ए-मलामत भी नहीं
सर सलामत है तो क्या संग-ए-मलामत की कमीजान बाक़ी है तो पैकान-ए-क़ज़ा और भी हैं
वक़्त के हाथ में कब संग-ए-मलामत आ जाए
सितारों का आहंग क्या है?ये ख़ुशबू है या बारिश-ए-संग क्या है
संग-ए-मलामत जिस पर आएमहफ़िल की महफ़िल झूम उट्ठी
हर संग है इक संग-ए-मलामत गोयाहर कतबा-ए-दीवार है दुश्नाम मुझे
सहर के उफ़ुक़ सेदेर तक बारिश-ए-संग होती रही
धुँद में डूबे हुए ख़ार ओ गुल ओ संग ओ ज़ुजाज अच्छे हैंएक इबहाम में तहलील हुए जाते हैं मंज़र सारे
दर-ओ-बाम,आहन ओ चोब ओ संग ओ सीमाँ के
मोतियों की कान हैया रग-ए-संग-ए-गिराँ-माया की इक पहचान है
धूप में लहरा रही है काकुल-ए-अम्बर-सरिश्तहो रहा है कम-सिनी का लोच जुज़्व-ए-संग-ओ-ख़िश्त
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