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नज़्म
आज तो हम बिकने को आए, आज हमारे दाम लगा
यूसुफ़ तो बाज़ार-ए-वफ़ा में, एक टिके को बिकता है
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
तुम्हें रुस्वा सर-ए-बाज़ार-ए-आलम हम भी देखेंगे
ज़रा दम लो मआल-ए-शौकत-ए-जम हम भी देखेंगे
साहिर लुधियानवी
नज़्म
अब भी बाज़ार-ए-वफ़ा सर्द है माज़ी की तरह
अब भी मजबूर है शाइ'र किसी मुफ़्लिस की तरह
सादिक़ नक़वी
नज़्म
तिरी रुख़्सत से बाज़ार-ए-मोहब्बत हो गया ठंडा
हुई वो सर्द आतिश जो कभी तू ने थी भड़काई
रज़ी बदायुनी
नज़्म
ख़ूब मोती रोलते हैं ताजिरान-ए-बा-सफ़ा
'फ़ैज़' बाज़ार-ए-तिजारत क़ुल्ज़ुम-ए-मव्वाज है
फ़ैज़ लुधियानवी
नज़्म
कि जब बाज़ार-ए-ताक़त में मनात-ओ-लात और 'उज़्ज़ा
बदल कर माहियत उ’लु हुबल का विर्द करते हैं
क़मर जहाँ नसीर
नज़्म
हम किस दरवाज़े पर जाएँ किस से जा कर फ़रियाद करें
बाज़ार-ए-तमद्दुन भी उन का दुनिया-ए-सियासत भी उन की
जमील मज़हरी
नज़्म
दिगर शाख़-ए-ख़लील अज़ ख़ून-ए-मा नमनाक मी गर्दद
ब-बाज़ार-ए-मोहब्बत नक़्द-ए-मा कामिल अय्यार आमद