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नज़्म
मुझ को प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह
तू ने दुनिया की निगाहों से जो बच कर लिक्खे
राजेन्द्र नाथ रहबर
नज़्म
नहीं हो तुम मगर वो चाँद तारे याद आते हैं
अकेले मैं तुम्हारी याद से बच कर कहाँ जाऊँ?
शौकत परदेसी
नज़्म
शौकत परदेसी
नज़्म
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
छलकती आँखों में ज़िंदगी के जो बच गए हैं वो ख़्वाब ढूँडें
भटकती गलियों में आबलों के गुलाब देखें