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नज़्म
अकेले मैं तुम्हारी याद से बच कर कहाँ जाऊँ?
लब-ए-ख़ामोश की फ़रियाद से बच कर कहाँ जाऊँ?
शौकत परदेसी
नज़्म
शौकत परदेसी
नज़्म
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
सितमगारों पे करती है ये साया अपने आँचल का
इसी की आड़ में अशरार-ओ-क़ातिल बच निकलते हैं
रहबर जौनपूरी
नज़्म
छलकती आँखों में ज़िंदगी के जो बच गए हैं वो ख़्वाब ढूँडें
भटकती गलियों में आबलों के गुलाब देखें