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नज़्म
साहिर लुधियानवी
नज़्म
बहे जाते थे बैठे इश्क़ के ज़र्रीं सफ़ीने में
तमन्नाओं का तूफ़ाँ करवटें लेता था सीने में
मख़दूम मुहिउद्दीन
नज़्म
ग़ुल शोर हुए ख़ुश-हाली के और नाचने गाने के खटके
मिर्दंगें बाजें ताल बजे कुछ खनक खनक कुछ धनक धनक
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
मजीद अमजद
नज़्म
ख़ुदा ने बहर-ए-उल्फ़त में तिरी उल्फ़त को खोया था
अनादिल भी बढ़े तेरी तरफ़ दामन को फैलाए