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नज़्म
किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
मैं ख़ुद मैं हसन कूज़ा-गर पा-ब-गिल ख़ाक-बर-सर बरहना
सर-ए-चाक ज़ोलीदा-मू सर-ब-ज़ानू
नून मीम राशिद
नज़्म
बरहना पाँव जलती रेत यख़-बस्ता हवाओं में
गुरेज़ाँ बस्तियों से मदरसों से ख़ानक़ाहों में
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
कभी जो आवारा-ए-जुनूँ थे वो बस्तियों में फिर आ बसेंगे
बरहना-पाई वही रहेगी मगर नया ख़ारज़ार होगा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हर शहर-ए-तरब पर गरजेगा हर क़स्र-ए-तरब पर कड़केगा
ये अब्र हमेशा बरसा है ये अब्र हमेशा बरसेगा