आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "barsar-e-mahfil"
नज़्म के संबंधित परिणाम "barsar-e-mahfil"
नज़्म
तिरे लुत्फ़-ओ-अता की धूम सही महफ़िल महफ़िल
इक शख़्स था इंशा नाम-ए-मोहब्बत में कामिल
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
अंधेरा बरसर-ए-पैकार है तो ग़म क्या है
बढ़ाओ 'अज़्म की लौ आफ़तों पे छा के चलो
मंशाउर्रहमान ख़ाँ मंशा
नज़्म
दिमाग़ बर-सर-ए-हफ़्त-आसमाँ था देहली का
ख़िताब-ए-ख़ित्ता-ए-हिन्दोस्ताँ था देहली का
मोहम्मद अली तिशना
नज़्म
क्या ख़ुदा का ख़ौफ़ कैसा जज़्बा-ए-हुब्ब-ए-वतन
बरसर-ए-पैकार थे आपस में शैख़-ओ-बरहमन
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
नज़्म
इक वो हैं जो करते हैं मह-ओ-मेहर को तस्ख़ीर
इक हम हैं कि रहते हैं फ़क़त बरसर-ए-पैकार
अमीर चंद बहार
नज़्म
मुझे नफ़रत नहीं पाज़ेब की झंकार से लेकिन
अभी ताब-ए-नशात-ए-रक़्स-ए-महफ़िल ला नहीं सकता