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नज़्म
ऐ बादल के प्यारे टुकड़ो गरजो न यहाँ बरसो न यहाँ
बिखराओ न तुम इस वादी में ये सच्चे मोती की लड़ियाँ
सलाम संदेलवी
नज़्म
साक़ी फ़ारुक़ी
नज़्म
ये सरगोशियाँ कह रही हैं अब आओ कि बरसों से तुम को बुलाते बुलाते मिरे
दिल पे गहरी थकन छा रही है
मीराजी
नज़्म
जिन शहरों में गूँजी थी ग़ालिब की नवा बरसों
उन शहरों में अब उर्दू बेनाम-ओ-निशाँ ठहरी
साहिर लुधियानवी
नज़्म
हर शहर-ए-तरब पर गरजेगा हर क़स्र-ए-तरब पर कड़केगा
ये अब्र हमेशा बरसा है ये अब्र हमेशा बरसेगा