aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "basne"
कभी हम ख़ूब-सूरत थेकिताबों में बसीख़ुश्बू की सूरतसाँस साकिन थीबहुत से अन-कहे लफ़्ज़ों सेतस्वीरें बनाते थेपरिंदों के परों पर नज़्म लिख करदूर की झीलों में बसने वालेलोगों को सुनाते थेजो हम से दूर थेलेकिन हमारे पास रहते थेनए दिन की मसाफ़तजब किरन के साथआँगन में उतरती थीतो हम कहते थेअम्मी तितलियों के परबहुत ही ख़ूब-सूरत हैंहमें माथे पे बोसा दोकि हम को तितलियों केजुगनुओं के देस जाना हैहमें रंगों के जुगनूरौशनी की तितलियाँ आवाज़ देती हैंनए दिन की मसाफ़तरंग में डूबी हवा के साथखिड़की से बुलाती हैहमें माथे पे बोसा दोहमें माथे पे बोसा दो
ये तुम ने क्या लिखामैं ने तुम्हें दिल से भुला डालातुम्हें तो याद होगाबिछड़ते वक़्त तुम ने ही कहा थाअगर तुम चाहते हो येतुम्हारे और मेरे दरमियाँये रिश्ता उम्र भर यूँही रहे क़ाएमतो इन लफ़्ज़ों से यूँही दोस्ती रखनाकभी फ़ुर्सत मिले तो आओ और देखोमें अब भी लफ़्ज़ लिखता हूँमें इन लफ़्ज़ों में जीता और मरता हूँमें इन लफ़्ज़ों में अपना ग़मकुछ इस सूरत समोता हूँकि मेरा ग़म भी सब कोअपना ग़म मालूम होता हैतुम्हें फ़ुर्सत मिले तो आओ और देखोमिरी साँसों में बसने वाला इक पल भीतुम्हारे ज़िक्र से ख़ाली नहीं होता
हम तसव्वुफ़ के निहाँ-ख़ानों में बसने वालेअपनी पामाली के अफ़्सानों पे हँसने वालेहम समझते हैं निशान-ए-सर-ए-मंज़िल पाया
देस में बसने वाला हर इक सच-पसंदज़ुल्म-ओ-वहशत से दूरी पर हर कार-बंदसाँस लेने का हक़ माँगने वाला हर नौजवाँज़िंदगी की रमक़ खोजने वाला हर ख़ानदाँसारे ग़द्दार हैंसारे जासूस हैंहाकिम-ओ-सिपह-सालार-ओ-अशरफ़ियाके इशारों पे न नाचने वाले कुफ़्फ़ार हैंनाक़िदीं साज़िशीसोचने वालेगुस्ताख़ हैंऔर वो सारे क़लमकारएजेंट हैंजो निगूँ-सर नहींवो जिन्हें फ़ितरत-ए-सब्ज़ नेजाँ-फ़िशानी से लोगों के चेहरों पे उगती थकनवहशतें तीरगीदूर पुर-शोर की सच्ची तारीख़ में टॉनिक देने की गुस्ताख़ियोंका जरीदा कियाआयत-ए-मुफ़्लिसी से कोई सर-कशीगुम्बद-ए-तिश्नगी पर शिकायत कोईमज़हब-ए-तीरा-बख़्ती की तौहीन हैअपनी धरती के गले से अपने लिए कोई हिस्सा तलब करना इल्हाद हैऔर वैसे भी गंदुम तो शैतानियत ही की ईजाद हैभूक ग़द्दार है
हम मोहब्बत के निहाँ-ख़ानों में बसने वालेअपनी पामाली के अफ़्सानों पे हँसने वालेहम समझते हैं निशान-ए-सर-ए-मंज़िल पायाहम मोहब्बत के के ख़राबों के मकींकुंज-ए-माज़ी में हैं बाराँ-ज़दा ताइर की तरह आसूदाऔर कभी फ़ितना-ए-नागाह से डर कर चौंकेंतो रहें सिद्द-ए-निगाह नींद के भारी पर्दे
लाओ हाथ अपना लाओ ज़राछू के मेरा बदनअपने बच्चे के दिल का धड़कना सुनोनाफ़ के उस तरफ़उस की जुम्बिश को महसूस करते हो तुमबस यहीं छोड़ दोथोड़ी देर और उस हाथ को मेरे ठंडे बदन पर यहीं छोड़ दोमेरे बे-कल नफ़स को क़रार आ गयामेरे ईसा मिरे दर्द के चारागरमेरा हर मू-ए-तनउस हथेली से तस्कीन पाने लगाउस हथेली के नीचे मिरा लाल करवट सी लेने लगाउँगलियों से बदन उस का पहचान लोतुम उसे जान लोचूमने दो मुझे अपनी ये उँगलियाँउन की हर पोर को चूमने दो मुझेनाख़ुनों को लबों से लगा लूँ ज़राफूल लाती हुई ये हरी उँगलियाँमेरी आँखों से आँसू उबलते हुएउन से सींचूँगी मेंफूल लाती हुई उँगलियों की जड़ें चूमने दो मुझेअपने बाल अपने माथे का चाँद अपने लबये चमकती हुई काली आँखेंमिरे काँपते होंट मेरी छलकती हुई आँख को देख कर कितनी हैरान हैंतुम को मा'लूम क्या तुम को मा'लूम क्यातुम ने जाने मुझे क्या से क्या कर दियामेरे अंदर अँधेरे का आसेब थाया कराँ ता कराँ एक अनमिट ख़लायूँही फिरती थी मैंज़ीस्त के ज़ाइक़े को तरसती हुईदिल में आँसू भरे सब पे हँसती हुईतुम ने अंदर मिरा इस तरह भर दियाफूटती है मिरे जिस्म से रौशनीसब मुक़द्दस किताबें जो नाज़िल हुईंसब पयम्बर जो अब तक उतारे गएसब फ़रिश्ते कि हैं बादलों से परेरंग संगीत सर फूल कलियाँ शजरसुब्ह-दम पेड़ की झूमती डालियाँउन के मफ़्हूम जो भी बताए गएख़ाक पर बसने वाले बशर को मसर्रत के जितने भी नग़्मे सुनाए गएसब ऋषी सब मुनी अंबिया औलियाख़ैर के देवता हुस्न नेकी ख़ुदाआज सब पर मुझेए'तिबार आ गया ए'तिबार आ गया
ख़्वाब शब की मुंडेरों पे बैठे हुएघूरते हैं मुझेमेरी आँखों में बसने को बेचैन हैंमैं इसी ख़ौफ़ से रात भरजागता हूँ कि मैं सो गया गरतो येमेरी आँखों में बस जाएँगेऔर कलउन की क़ीमत चुकानी पड़ेगी मुझे
मैं इक आसीबहुत नाचीज़ बंदा हूँमिरी इक इल्तिजा हैकि जब उस दिनघनी दाढ़ी का एक इक बाल गिन करतुम्हें हूरें मिलेंगीतो उन हूरों के सदक़े मेंज़मीं पर बसने वालीइस हक़ीर औरत की सब कमज़ोरियाँसारी ख़ताएँ माफ़ कर देनाइसे भी बख़्शवा देना
खुली फ़ज़ा में साफ़ हवा के जैसा वोबारिश के पानी के जैसा वोगहरा था मिट्टी से रिश्ता पैरों काउस रिश्ते के बीच न आई चप्पल भीघड़ी न बाँधी कभी कलाई पर उस नेसूरज-तारे वक़्त उसे बतलाते थेअपने बल पर अपनी धुन में रहता थानहीं किसी से गाँव में वो डरता थानाम की ख़्वाहिश थी न उसे पहचान की थीबस अपने कामों से मतलब रखता थावो दाना था वो मिट्टी थावो पौदा था वो मौसम थावो सच्चा ख़ालिस इंसान थाजैसे आदम और हव्वा थेवो तन्हा थाएक बड़े से घर में तन्हा रहता थाभैंसें उस के साथ थींउस की बात समझती थींवो भी उन की ही भाषा में उन से बातें करता थाघर पर अक्सर लगा के ताला यूँही साखलियानों में रहने वाला बाप मिराखेतों खेतों बसने वाला बाप मिराआम की छाँव में सोने वाला बाप मिराअब मिट्टी में सोता हैआम के पेड़ की ख़ुश्क जड़ों में रोता है
शहर हँसा और हँसते हँसते गाँव से बोला सुनो सुनोऊँचे हैं मीनार मिरेबड़े बड़े बाज़ार मिरेकारें सब चमकीली हैंबसें भी नीली पीली हैंमिल भी हैं मशहूर बहुतमेहनत-कश मज़दूर बहुतगाँव हँसा और हँसते हँसते शहर से बोला सुनो सुनोफ़स्लें मेरी हरी हरीगेहूँ की बालीं भरी-भरीलोग जो सीधे सादे हैंधरती के शहज़ादे हैंसारे घर आबाद रहेंबसने वाले शाद रहेंहम कहते हैं दोनों ही तुमअपनी जगह पर सच्चे होअपनी जगह पर अच्छे हो
बसने वालों में दिल्ली केबोलो सच्चे दोस्त नहीं थे
जारी जा उड़ जा चिड़ियाउस घर में मत आ चिड़ियाक्या तुझ को मा'लूम नहींये घर कब से बंद पड़ा हैबहुत दिनों के बा'द घड़ी-भरउस घर का दरवाज़ा खुला हैऔर तो उस घर में पगलीरहने बसने आई हैछोड़ गए जो उस घर कोउन पर हँसने आई हैजारी जा उड़ जा चिड़ियाइस घर में मत आ चिड़ियाअभी अँधेरा छा जाएगाये घर तुझ को खा जाएगा
यक-रंग में सैकड़ों रंग होते हैंहल्के, गहरे, मद्धम शफ़्फ़ाफ़रौशनियों से भरे, चमकते, जगमगातेसुरमई अबरेशमी नक़ाबें डालेघुले मिलेधूप छाँव की आँख-मिचोली खेलतेअनोखे नुक़ूश में उभरे उड़ते हुएया फिर इतने गम्भीरजैसे जहाज़ों के लंगरइन में लहरें होती हैंतड़पती बेचैन तूफ़ानीऔर ऐसी भीजिन पर सुकून के साएछाए हुए होते हैंलेकिन उन के नीचेपहाड़ी झरनों की तेज़ी, तिलमिलाहटजुस्तुजू की लहकआरज़ू की पागल महकछुपी होती हैऔर जब कई रंगउन की बे-शुमार तरंगेंतरह तरह की छोटी बड़ीछुपी और ज़ाहिर लहरेंमिलती एक दूसरे से टकराती हैंतब नए हैरत-नाक हयूलेआधे पूरे बल खाते दाएरेमौहूम लकीरेंला-जवाब शक्लेंऔर ऐसे पैकर जो किसी दूसरी चीज़ की तरह नहीं होतेलेकिन जो ख़ुद अपनी अलग अनूप हस्ती मेंनई-नवेली दुल्हननौ-ज़ाईदा बच्चे की तरहअच्छे लगते हैंवजूद में आ जाते हैंझिलमिलाते धब्बों का ये शोलाइंसानी उँगलियों ज़ेहन और रूह का ये करिश्माज़बान का ये जौहरी धमाकाज़िंदगी को पर लगा देता हैउसे इतना ऊँचा उड़ा ले जाता हैजहाँ से इस धरतीऔर इस पर बसने वालों कोहम यूँ देखते हैंजैसे तीतोफ़ ने उसे देखा थाऔर उस की सब अच्छाइयोंख़ूबसूरतियोंइस की ख़ुशबुओंलताफ़तों रंगीनियों का परतवहमारी रूहों पर भी पड़ता हैहम बदल जाते हैंऐसा ही एक चित्रतुम को मालूम नहींकिन आसमानी रंगों से खींचाअप्सराओं की न जाने कैसी जादू मुद्राओं से भरास्वर्ग के कौन से मधुर रागों में ढालाऔर चुपके सेमन के गर्म तपते आँगन में रख दियादफ़अतन हज़ारों बहारें जाग पड़ींगुलाबी पंखुड़ियाँ बरसने लगींमहकती हवाओं सेहल्की हल्की ठंडी नर्मियाँ टपक पड़ींऔर ज़िंदगी की ख़ाली माँगसिन्दूर से भर गई!
घर हुमकने लगे लोग बसने लगेरंग लौ दे उठे फूल हँसने लगेअब कहीं कोई तन्हा सड़क कोई वीरान कोना उभरता नहींकोई दिलदार साया बुलाता नहीं कोई ग़म-ख़्वार रस्ता निकलता नहीं
आँसूओं की बस्ती मेंरसने-बसने वालों कोकब कोई ग़रज़ इस सेकारोबार-ए-हस्ती मेंनफ़ा क्या ख़सारा क्याउम्र के ख़ज़ाने मेंबेश-ओ-कम का यारा क्या
चिड़िया घर में बसने वालीकैसा मिज़ाज-ए-आली हैमुन्नू भय्या पूछ रहे हैंक्या कोई पिंजरा ख़ाली हैदौड़ में सब से अव्वल चीताजंगल की हर रेस में जीताजल्दी जल्दी बोल रे साथीकच्चा पपीता पक्का पपीताजंगल के सुल्तान को देखोशेर-ए-बबर की शान को देखोऐसा बहादुर कोई नहीं हैदिल वाले मेहमान को देखोभाग रहा है हाँप रहा हैडर के मारे काँप रहा हैबुज़दिल गीदड़ नाम है उस कादेखो कैसा भाँप रहा हैहाथी सूंड हिलाने वालेलम्बे दाँत दिखाने वालेदरिया दरिया जंगल जंगलभारी बोझ उठाने वालेबातों में बेबाक बहुत हैसब पर इस की धाक बहुत हैबच्चो इस का नाम बताओये बीबी चालाक बहुत हैबन-मानुस के खेल अजब हैंसर्कस जैसे सारे ढब हैंऐसे खेल कहाँ से सीखेदेखने वाले हैराँ सब हैंनाच दिखाने वाले भालूतू काला तेरा नाम है कालूकिस से है तिरी रिश्ता-दारीतू आख़िर है किस का ख़ालूडुग डुग डुग डुग बंदर आएख़ुशी ख़ुशी ससुराल को जाएछन-छन छन-छन नाचे बंदरियाजैसे मदारी चाहे नचाएज़ेबरा देखो धारियों वालापाया जिस ने रूप निरालासुब्ह भी इस की शाम भी इस कीआधा गोरा आधा कालाये कछवे से हारने वालाझूटी शेख़ी बघारने वालाआख़िर मुँह की खा जाता हैऔरों को ललकारने वालासाँप जो पल पल बल खाते हैंबीन बजे तो लहराते हैंलहराएँ तो जागे सोएलाखों रंग नज़र आते हैंकंठी पहने तोते आएहरे हरे से पर फैलाएमिठ्ठू बेटा पढ़ लेते हैंकोई इन को अगर पढ़ाएसारस देखो कितना बड़ा हैबादल जैसे आन पड़ा हैमछली आए और पकड़ लूँपानी में चुप-चाप खड़ा हैवो देखो वो आया ज़राफ़ाजैसे कोई बेरिंग लिफ़ाफ़ाहम देते हैं उस को दुआएँगर्दन में हो और इज़ाफ़ा
मेरे मश्कीज़े में पानी नहीं थामेरे पाँव नंगे थेमुझे किसी मंज़िल का पता नहीं थाऔर किसी सम्त का तअय्युन तक करने सेमैं क़ासिर थामेरे पास बस एक ही रास्ता रह गया थासो मैं ने अपने पाँव से काँटा निकालाऔर रेत में बो दियाचंद घंटों में वो एक साया-दार दरख़्त में तब्दील हो गयाऔर उस में अजीब ओ ग़रीब फल पैदा हो गएमैं ज़हरीलेऔर ग़ैर ज़हरीले फलों में तमीज़ नहीं कर सकता थाऔर मेरे लिएकोई मन्न ओ सलवा भी आसमान से उतरता नहीं थासो मैं ने इन फलों को रग़बत से खायाइतने में शाम हो गईऔर सहरा की तारीकी मेंसहरा के ज़हरीले कीड़े मकोड़ेअपने बिलों से निकल कर मेरे बदन से चिमट गएकुर्सी पर नीम-दराज़ हो जाता हैहम दोनोंकोई बात नहीं करतेन सिगरेट जलाने के लिएएक दूसरे को लाइटर पेश करते हैंउस का बस चले तो वो मुझे हलाक कर देमेरे भी उस के बारे मेंयही कुछ जज़्बात हैंइस के बावजूदजब भी मैं उसे बुलाता हूँवो आ जाता हैमेरे बुलावे में न इसरार होता हैन धमकीन कोई शर्तये वो भी जानता हैमेरे बुलावे मेंकिसी ख़्वाहिश की रमक़ नहींहम दोनोंकिसी भी दिनअपने क़रीब तरीन सुतून की ओट ले करएक दूसरे को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैंलेकिनज़िंदा बचने वाले के मुक़ाबले मेंमर जाने वालाज़्यादा ख़ुश-नसीब साबित होगाबचने वाले कोहलाक होने वाले का जिस्मउठा कर चलना होगाउस के ख़ून आलूद कपड़े उतार करउसे साफ़ सुथरे कपड़े पहनाने होंगेमरने वाले की लाश कोकिसी भी क़िस्म के ख़ुर्दबीनी कीड़ों सेमहफ़ूज़ रखने के लिएजतन करना होंगेफिर उस की लाश कोसहारा दे करकिसी आराम-दह कुर्सी पर बैठाना होगाउस के मुँह से सिगरेट लगाना होगाउसे लाइटर भी पेश करना होगाबल्कि उस की मौत कोअपनी मौत समझते हुएदो क़ब्रेंबराबर खोदनी होंगीबसें और कारें उन के क़रीब आ करदरख़्तों को छूती हैंऔर उन्हेंसड़क के दाएँ या बाएँ हटाने में जुट जाती हैंलेकिन उसी दौरानशराब की बू उन्हें भीबद-मस्त कर देती हैवो भी सड़क के बीचों-बीच नाचने लगती हैंफिर तो बल खाती सड़क भीउठ खड़ी होती हैऔर ठुमके लगाने लगती हैघर थरथरा उठते हैंउन में सोए हुए मकीनहड़बड़ा कर जाग जाते हैंउन्हें अपनी आँखों पर यक़ीन नहीं आताशराबी दरख़्तोंनशे में धुत बसों, कारोंऔर बद-मस्त नाचती सड़क कोशहर में बसने वाले लोगों कीकोई परवा नहीं
कई दिनों सेकिसी बहानेदिल बहलता ही नहींयूँ लगता हैजैसेज़ेहन के गोशे मेंफिर हलचल होने वाली हैकोई परिंदातोड़ के पिंजरादूर पहुँचने वाला हैशायद किसी सय्यारे परइक दुनिया बसने वाली है
आज़ादी का जश्न मनाओगीत ख़ुशी के मिल के गाओहर हर गाम पे इशरत-ए-मंज़िलजैसे लैला ज़ीनत-ए-महमिलसाग़र रक़्साँ महफ़िल महफ़िलशौक़ है दौर-ए-जाम में शामिलख़ूब पियो और ख़ूब पिलाओआज़ादी का जश्न मनाओएक ही देश के बसने वालेहिन्द की अज़्मत के रखवालेमौत से टकराएँ वो जियालेदुनिया उन से दर्स-ए-वफ़ा लेख़ल्क़ को ये पैग़ाम सुनाओआज़ादी का जश्न मनाओलेकिन तुम को ये भी ख़बर हैसारी जनता नौहागर हैइक पल जीना भी दूभर हैसाँस नहीं है इक नश्तर हैकुछ उन को राहत पहुँचाओआज़ादी का जश्न मनाओये फ़ाक़ों की मारी जनताबेबस और दुखियारी जनतादेश की प्यारी प्यारी जनताभारत की बलिहारी जनताजनता के दुख-दर्द मिटाओआज़ादी के जश्न मनाओदौर में यूँ आए पैमानाझूम उठे हर इक दीवानाछेड़ दे मुतरिब कोई तरानाआ जाए इशरत का ज़मानाआओ दिलों के जोत जगाओआज़ादी का जश्न मनाओ
रात ढलती है सुब्ह होती हैखोल दो अब तो उठ के दरवाज़ाइस अँधेरी सी कोठरी में आजवक़्त आया है रहने बसने कोऐसे मेहमाँ का क्या भरोसा हैये दबे पाँव लौट जाएगा
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